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खेल शिक्षकों की लड़ाई, सरकार की ढिटाई

 खेल शिक्षकों की लड़ाई, सरकार की  ढिटाई

  • शिक्षा विभाग ने फिर जारी किया खेल शिक्षकों की गिनती का सर्कुलर 
  • 2017 के गजट नोटिफिकेशन में सरकार ने निकाले थे पद, भर्ती आज तक नही

भोपाल। मध्य प्रदेश में खेल शिक्षकों की स्थिति दयनीय है। प्रदेश के हजारों खेल शिक्षक दशकों से न केवल अपने अधिकार की लड़ाई लड़ रहे हैं, बल्कि रोजगार विहीन होने के चलते जीवन की गाड़ी को खींचने के लिए भी संघर्ष कर रहे है। आगामी दिनों में खेल शिक्षक एक बार फिर सड़कों पर उतरने का मन बना रहे हैं। ऐसे में शिक्षा विभाग ने 20 जुलाई को एक सर्कुलर जारी कर गायन और वादन  के साथ खेलकूद के अ श्रेणी के शिक्षकों की सीधी भर्ती के लिए जिलेवार डाटा मंगाने के लिए संयुक्त संचालकों को आदेशित किया है। हालांकि ये बात अलग है की पिछले कई वर्षों से विभाग द्वारा इस तरह की खानापूर्ति की जाती रही है।

2017 में पद बनाए पर भर्ती अब तक नहीं

विडंबना ही है कि वर्ष 2017 में सरकार द्वारा जारी गजट नोटिफिकेशन में 1760 से अधिक पदों का सृजन किया गया था। हालांकि इस पर अभी तक अमल नहीं किया गया और ना ही भर्ती की जा सकी है। 

2019 में भी कराए रजिस्ट्रेशन

बीपीएड संघ के प्रदेश अध्यक्ष बंशीलाल राठौर ने बताया कि मध्यप्रदेश मे 2008 के बाद स्कूल शिक्षा विभाग मे खेल शिक्षकों की भर्ती नहीं हुई है और ना ही प्रशिक्षित डिग्री डिप्लोमाधारी को खेल शिक्षक पदो पर अतिथि के रूप मे नही रखा गया है। पिछले कई वर्षों से की जा रही मांग के बाद वर्ष 2019 में खेल शिक्षकों को अतिथि शिक्षक के तौर पर शासकीय स्कूलों में भर्ती देने के लिए प्रक्रिया शुरू की गई थी। इसके लिए बकायदा पंजीयन भी कराया था और स्कूलों का चयन भी कर लिया गया था, लेकिन अब तक किसी खेल शिक्षक को इसका लाभ नहीं मिल सका है। 


छलावा है यह आदेश

बी पी एड संघ के महा सचिव भीम जाट कहते हैं कि यह आदेश छलावा मात्र है। इस प्रकार के आदेश प्रतिवर्ष निकाले जाते हैं, लेकिन यह आंदोलन पर प्रभाव डालने की कोशिश भर है। हमारी लड़ाई आगे निरतर जारी रहेगी ...


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