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पहचान खो चुके ऐशबाग को सुनहरे दिन लौटने का इंतजार

पहचान खो चुके ऐशबाग स्टेडियम को 

सुनहरे दिन लौटने का इंतजार

भोपाल। क्रिकेट को यूं ही अन्य खेलों का अजगर नही कहा जाता। एक अवसर पर हॉकी या अन्य खेल इसकी चमक के आगे अपनी पहचान ही खो चुके थे। लेकिन इस ओलंपिक भारतीय हॉकी टीम ने ओलंपिक के लंबे सूखे को कांस्य लाकर खत्म कर दिया। न सिर्फ सुनहरे इतिहास को, बल्कि लगभग बौने हो चुके अन्य खेल खासकर हॉकी को भी नई बूटी दी है। उधर महिला टीम के कारनामे ने भी हॉकी को जवां कर दिया है।

जर्जर होकर रह गया स्टेडियम ऐशबाग






 ऐशबाग स्टेडियम हॉकी के विश्व स्तरीय खिलाड़ियों का गवाह रहा है। यहां बड़े बड़े खिलाड़ियों ने अपने हुनर के जलवे बिखेरे हैं। इस बीच राष्ट्रीय खेल के जवाल से अगर सबसे अधिक प्रभावित हुआ है तो वह ऐशबाग स्टेडियम ही है। अपने वैभव के विपरीत इसकी सूरत बिगड़ रही है। वर्ष 1931 में बनकर तैयार ऐशबाग स्टेडियम अब जर्जर हो गया है। अब जब ओलंपिक में भारतीय टीम में शानदार प्रदर्शन किया है एक बार फिर देश को समर्पित ऐशबाग स्टेडियम के कायाकल्प की मांग उठने लगी हैं। 

भोपाल की पहचान रही है हॉकी

भोपाल हॉकी का इतिहास काफी पुराना है। हॉकी की नर्सरी कहलाने वाला भोपाल का एक दौर इसकी नजर रहा है। नवाब भोपाल खुद हॉकी के कद्रदान रहे हैं। वर्ष 1931 में नवाबों ने अंतरराष्ट्रीय औबेदुल्ला खां गोल्ड कप की शुरुआत की थी। उन्होंने न सिर्फ मैदान दिया, बल्कि खुद भी इसे पूरे एहतेमाम से आयोजित करते थे। देशभर से आने वाली टीमों को जहांगीरिया स्कूल में ठहराया जाता था। मई के अंत में आयोजित टूर्नामेंट में मुख्य टीमों में रामपुर, पेशावर, कलकत्ता, मुंबई, पंजाब, अमृतसर, मुरादाबाद, लखनऊ और बरेली की टीमों के नाम मुख्य थे। इसके अलावा इंडियन रेलवे और एयर इंडिया भी उल्लेखनीय हैं।

 वर्ष 2009 में खेल एवं युवा कल्याण विभाग ने भोपाल हॉकी एसोसिएशन की सहमति से स्टेडियम में करोड़ों रुपए खर्च कर एस्ट्रो टर्फ बिछाई थी।

जब खेल भोपाल की पहचान थी

कहा जाता है कि भोपाल नवाब हमीदुल्लाह खान के बड़े भाई ने 1910 में क्रिकेट की टीम बनाई थी। उस ज़माने में उसे टीम हमीदुल्लाह के नाम से जाना जाता था। यही नहीं पूरे माह चलने वाले इस आयोजन में हॉकी, फुटबॉल और टेनिस जैसे अन्य खेल भी शामिल थे।  

जब ग्रहण की नजर चढ़ा आयोजन

1931 से लेकर 2001 तक इसका आयोजन 63 बार किया जा चुका है। यह वो दौर था जब भोपाल में आयोजित होने वाले ओबेदुल्लाह हॉकी टूर्नामेंट की ख्याति देश विदेश में थी। विश्व के दर्जनों देश इसमें शिरकत को अपनी शान समझते थे। लगभग खत्म हो चुके आयोजन के वजूद को 2010 में फिर 64वें टूर्नामेंट के रूप में और 2011 में 65वें और 2012 में 66वें औबेदुल्ला खां गोल्ड कप की शुरुआत फिर की गई, लेकिन भोपाल हॉकी एसोसिएशन और खेल विभाग के विवाद के चलते अब तक इस अंतरराष्ट्रीय स्तर के टूर्नामेंट की शुरुआत ही नहीं हो सकी है।








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